कोरोना काल के योद्धा डॉ. लाल सिंह रावत: मानद डॉक्टरेट से सम्मानित 8 वर्षों से दिल्ली में कर रहे निस्वार्थ समाजसेवा

उत्तराखंड की जन्मभूमि से दिल्ली की कर्मभूमि तक, इंसानियत के लिए समर्पित एक प्रेरणादायक सफर

आज के दौर में जहां सफलता को अक्सर पद, पैसा और व्यक्तिगत उपलब्धियों से जोड़ा जाता है, वहीं डॉ. लाल सिंह रावत (Honoris Causa) ने सफलता का एक अलग अर्थ चुना—समाज के लिए कुछ करना और जरूरतमंदों के साथ खड़े रहना।

पिछले 8 वर्षों से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. लाल सिंह रावत ने आपदा राहत, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, रोजगार मार्गदर्शन और सामुदायिक कल्याण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्य किया है। उनकी कहानी केवल सम्मान और उपलब्धियों की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच की कहानी है जिसमें “मैं” से पहले “हम” आता है।

जन्मभूमि उत्तराखंड, कर्मभूमि दिल्ली

2 अप्रैल 1986 को जन्मे डॉ. लाल सिंह रावत का संबंध देवभूमि उत्तराखंड से है। वे उत्तराखंड को अपनी जन्मभूमि और दिल्ली को अपनी कर्मभूमि मानते हैं।

संयुक्त परिवार और नैतिक मूल्यों के बीच पले-बढ़े डॉ. रावत के भीतर बचपन से ही समाज और लोगों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। परिवार से मिले संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व में यह विश्वास मजबूत किया कि जीवन की वास्तविक सार्थकता केवल अपने लिए आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए उपयोगी बनने में है।

दिल्ली आने के बाद उन्होंने इसी सोच को अपनी कर्मभूमि पर उतारना शुरू किया। धीरे-धीरे लोगों की समस्याओं को समझते हुए उन्होंने सामाजिक सेवा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया।

कोरोना महामारी में बने ‘कोरोना वॉरियर’

कोरोना महामारी का दौर देश के लिए बेहद कठिन था। लोग अपने घरों में सुरक्षित रहने को मजबूर थे, भय और अनिश्चितता का माहौल था और जरूरतमंद परिवारों के सामने रोजमर्रा की आवश्यकताओं का संकट खड़ा हो गया था।

ऐसे कठिन समय में डॉ. लाल सिंह रावत ने पीछे हटने के बजाय लोगों के बीच रहकर सेवा का रास्ता चुना। उन्होंने दिल्ली के प्रमुख LNJP अस्पताल में सेवाएं दीं और कोरोना महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किया।

उनके प्रमुख प्रयासों में शामिल रहे—

  • जरूरतमंद परिवारों को भोजन और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना

  • नागरिकों को राशन कार्ड बनवाने में सहायता करना

  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद करना

  • कोरोना जागरूकता अभियान चलाना

  • लोगों के बीच फैली भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास करना

महामारी के उस कठिन दौर में उनके साहस और सेवा भावना के लिए उन्हें ‘कोरोना वॉरियर सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।

लेकिन उनके लिए यह सम्मान मंजिल नहीं था। किसी जरूरतमंद परिवार तक भोजन पहुंच जाना, किसी परेशान व्यक्ति को सरकारी प्रक्रिया समझा देना या किसी भयभीत इंसान को सही जानकारी दे पाना ही उनके लिए सबसे बड़ी संतुष्टि रही।

कोरोना के बाद भी नहीं रुकी सेवा

कोरोना महामारी समाप्त होने के बाद भी डॉ. लाल सिंह रावत की समाजसेवा की यात्रा थमी नहीं। बल्कि उनका कार्यक्षेत्र और व्यापक होता गया।

आपदा राहत के क्षेत्र में उन्होंने दिल्ली दंगों से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए आर्थिक सहयोग, भोजन और पानी उपलब्ध कराने जैसे कार्य किए।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने यमुना सफाई अभियान, वृक्षारोपण और स्वच्छता जागरूकता जैसे प्रयासों में योगदान दिया।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में वे निशुल्क चिकित्सा शिविरों, रक्तदान शिविरों और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों से जुड़े रहे।

वहीं, युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने करियर काउंसलिंग, रोजगार मार्गदर्शन और प्रेरणादायक सत्रों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

डॉ. लाल सिंह रावत जी न तो किसी संगठन से जुड़े हैं और न ही उनकी कोई संस्था है। वे जो भी कार्य करते हैं, उसे स्वयं करते हैं।

उन्होंने अपने क्षेत्र में जाकर मंदिरों में माँ गंगा के स्वरूप की तस्वीरें स्थापित की हैं।

समाज और संस्कृति से जुड़ाव

डॉ. लाल सिंह रावत की समाजसेवा केवल राहत और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रही। उन्होंने पहाड़ी समाज में एकता, संस्कार और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य किया।

उनका मानना है कि अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहकर समाज के लिए सकारात्मक भूमिका निभाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। यही सोच उन्हें लोगों के बीच जोड़ती है और सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

मानद डॉक्टरेट: वर्षों की सेवा को मिला सम्मान

लगातार सामाजिक कार्यों और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए Iconic Human Rights & Educational Organization, जिसे भारत सरकार के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) में पंजीकृत बताया गया है, द्वारा डॉ. लाल सिंह रावत को मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate – Honoris Causa) से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान उनके लिए केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि लंबे समय से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की पहचान है।

उनकी सेवाओं और कार्यों को India Times Group, Punjab Kesari, Navodaya Times, Media Hindustan और Khabar India 24x7 जैसे मीडिया संस्थानों द्वारा भी सराहा गया है।

“मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”

डॉ. रावत के जीवन और कार्यों के पीछे एक सरल लेकिन गहरा विचार है—“मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”

उनके साथ काम करने वाले लोग उन्हें सरल, विनम्र और निरंतर मेहनत करने वाला व्यक्ति बताते हैं। शायद यही सादगी उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने समाजसेवा को दिखावे या केवल अवसर विशेष तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे लगातार निभाई जाने वाली जिम्मेदारी के रूप में अपनाया।

उनकी यात्रा यह भी सिखाती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कई बार किसी जरूरतमंद का हाथ थाम लेना, उसकी समस्या सुन लेना या सही समय पर छोटी-सी मदद कर देना भी उसके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

भविष्य की राह: सेवा का सफर जारी है

पिछले 8 वर्षों की सामाजिक सेवा के दौरान डॉ. लाल सिंह रावत ने आपदा राहत से लेकर स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा, युवा मार्गदर्शन और सामुदायिक कल्याण तक विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया है।

उनकी कहानी केवल इस बात की कहानी नहीं है कि उन्होंने कितने सम्मान हासिल किए। असली कहानी यह है कि उन्होंने अपने समय और ऊर्जा को उन लोगों के लिए समर्पित किया, जिन्हें किसी सहारे, सहयोग या मार्गदर्शन की जरूरत थी।

उत्तराखंड की जन्मभूमि से दिल्ली की कर्मभूमि तक का उनका सफर एक संदेश देता है—सच्ची सफलता केवल अपने लिए आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि किसी और के जीवन में उम्मीद की एक किरण बनने में है।

डॉ. लाल सिंह रावत का सफर हमें याद दिलाता है कि एक व्यक्ति भी निरंतर प्रयास, संवेदनशीलता और सेवा भावना के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत कर सकता है।

क्योंकि उनके लिए समाजसेवा कोई एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक संकल्प है।

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